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Yet Another Desperate Plea to HRD Minister: This Time from Final Year Students of B.A, B.com, B.Sc to UGC For Postponement of Exams

From the day we launched Manushi on August 15, Manushi mailbox has been swamped by desperate emails from students appearing for various competitive exams in India. It started with NEET & JEE aspirants. Soon students appearing for several other entrance and final year (Undergraduate) exams came with their specific grievances. They are all desperately pleading for postponement due to highly disturbed conditions in most parts of India on account of Corona Pandemic, devastating floods and the economic downturn. Given the kind of stress youngsters at a very impressionable age are facing even in normal times on account of competitive and Final year exams, their plight during this time of unprecedented crisis should be cause for national concern. 

At a time when even Courts, including the mighty Supreme Court of india, have shut their doors to regular hearings, to expect teenagers to appear for exams in the midst of such crisis is to jeopardize these young lives. In such a situation the lack of compassion shown by the HRD ministry is worrisome.

Manushi urges the HRD minister to set up a special Grievance Redressal Cell managed by competent and caring officers to respond with speed and compassion to problems faced by students as a result of lapses or flaws in policies formulated by and decisions taken by HRD Ministry.

We publish below the letter sent by Ms. Ananya Pahari (A Student) containing her plea on behalf of all Final Year students of Undergraduate courses across India requesting for postponement:

From: Ananya Pahari <ananyapahari6@gmail.com>
Date: Sun, Aug 16, 2020 at 11:52 PM
Subject: Cancellation of the final year examination
To: <
madhukishwar@manushi.in>

On behalf of the 31 student petitioners against the UGC in the Supreme Court and all other final year students across the country fighting for justice.

कोरोना जैसी अभूतपूर्व महामारी के बीच परीक्षा कराने के यूजीसी फैसले के खिलाफ अपनी लडाई शुरू

किये हुए हमें लगभग एक महीना हो गया है। हमारी लडाई में, हमने हर संभव प्रयास किये हैं, PMO

में शिकायतें दर्ज की हैं, ट्विटर ट्रेंड किये हैं, मानव् संसाधन मंत्री जी को पत्र लिखें हैं लेकिन कहीं

से कोई जवाब नही आया। 

 

फिर हमने भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया है। न्यायालय में हमने

यूजीसी के 6 जुलाई के दिशानिर्देशों को चुनौती देते हुए परीक्षाएँ रद्द करने व् छात्रों को पिछले वर्षों

में प्रदर्शन के आधार पर अंक देकर डिग्री प्रदान करने की मांग की है। हमारे केस की पहली सुनवाई

24 जुलाई को हुई थी जब मामला पहली बार स्थगित किया गया और 27 तारीख को एक अन्य पीठ

द्वारा सुनवाई के लिए स्थानांतरित किया गया। अभी पिछली सुनवाई 14 अगस्त को हुई है और फिर

से मामले को सुनने के लिए न्यायालय ने 18 अगस्त की तारीख तय की है।

 

न्यायालय में मामला लंबा खिंच रहा है और विश्वविद्यालय कोरोना के प्रकोप को नजरअंदाज करते

हुए हमारी ज़िन्दगी से खेल रहे है और मनमाने तरीके से परीक्षाएँ आयोजित करवा रहे हैं।

 

निम्न कारणों के कारण हम कोरोना महामारी के बीच परीक्षा देने में असमर्थ हैं:

पाठ्यक्रम अधूरा है

हमारे कॉलेज होली के छुट्टियों के समय ही बंद हो गए थे हमारा बीस से तीस प्रतिशत पाठ्यक्रम भी पूरा नही

हुआ है तो 20 % सिलेबस पढ़कर हम परीक्षा कैसे दे सकते है। 

ऑनलाइन एजुकेशन की बात सरकार करती है लेकिन इस में ध्यान देने वाली बात है कि सभी को कोर्स का पाठन

सामग्री ऑनलाइन नही मिलती है कंप्यूटर साइंस जैसें कोर्स के ऑनलाइन लेक्चर मिल जाते हैं लेकिन बाकी

कोर्स जैसे B.A, B.com, B.sc, जैसे पारंपरिक कोर्स का कोई स्टडी मटेरियल ऑनलाइन उपलब्ध नही ह। 

 

मानसिक तनाव:

कुछ राज्य सरकारें अपने स्तर पर परीक्षाएँ रद्द कर रही हैं, लेकिन यूजीसी कह रहा है कि वो डिग्री

मान्य नही होंगी | इसी घटनाक्रम के मध्य कुछ भी स्पष्ट नही है जिसके कारण छात्र बहुत ज्यादा

तनाव में हैं और देश के विभिन्न कोनो से छात्रों की आत्महत्या की खबरें रही है।

इस संकट की घडी में हमे हमारी सरकार से सहायता की उम्मीद थी उस समय मे सरकार हमे मौत के महु में धकेल रही ह। 

 

ऑनलाइन परीक्षा:

ऑनलाइन परीक्षा के लिए, इंटरनेट कनेक्शन और बिजली एक समस्या है। जहां इंटरनेट उपलब्ध है, वहां

कनेक्शन मजबूत नहीं है। साथ ही, भारत में केवल कुछ प्रतिशत छात्रों के पास ही लैपटॉप है.

ग्रामीण इलाकों में लड़कियों के पास स्मार्टफोन नही होते हैं तो वह ऑनलाइन परीक्षा कैसे देंग। 

 

ऑफ़लाइन परीक्षाएँ:

अगर हम ऑफलाइन परीक्षा देते हैं, तो खुद और अन्य छात्रों ,अभिभावकों, शिक्षकों और कर्मचारियों को संक्रमण

का खतरा होगा जो की सभी के लिए जानलेवा हो सकता है| प्रवेश परीक्षा देखा गया कि सरकार द्वारा

निर्धारित सोशल दूरी के नियमों का पालन नही किया गया जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रो से परीक्षार्थियों के

संक्रमित होने की खबरें रही है। 

 

हॉस्टल समस्या:

हॉस्टल में सोशल डिस्टन्सिंग संभव नहीं है। छात्र एक ही कमरे, बाथरूम और मेस साझा करते हैं। मकान मालिक

छात्रों को किराया पर कमरे देने के लिए तैयार नहीं हैं। इसके अलावा, कई छात्रावास को क्वारंटाइन सेंटर में भी

तब्दील किया गया ह। 

 

यातायात की समस्या:

इस समय सार्वजननक परिवहन निम्न स्तर पर चल रहा जिस कारण परीक्षा केंद्रों पर छात्रों का पहुँचना

असंभव है, साथ ही सार्वजननक परिवहन से यात्रा करने से वाइरस के संपर्क में आने का खतरा बहुत ज्यादा ह। 

छात्रों को विभिन्न शहरों और राज्यों से अपने कॉलेज / विश्वविद्यालय में आना पडेगा। यह काम छात्र और

अभिभावकों के लिए बेहद मुश्किल भरा ह। 

 

रोजगार और आगे की पढ़ाई में समस्या :

हम में से कुछ छात्रों का कॉलेजों से प्लेसमेंट हुआ है लेकिन डिग्री मिलने के कारण जोइनिंग नही हो

पाई ह।  विदेश की यूनिवर्सिटी प्रवेश बंद करने जा रही हैं लेकिन डिग्री होने के कारण हम आवेदन

नही कर सकत। 

 

कोरोना का डर:

अगर मैं या मेरे परिवार का कोई सदस्य संक्रमित हो जाता है,अस्पतालों में बिस्तरों की कमी है और

निजी अस्पतालों में इलाज बहुत महँगा है ,अगर किसी को जान का नुकसान होता है तो इसका जिम्मेदार

कौन होगा?

सरकार ने संक्रमित छात्रों के लिए कोई अतिरिक्त फण्ड जारी नही किया है हमे कोरोना हुआ तो हमे हमारे हाल पर

छोड दिया जाएग। 

 

सलूशन:

हमने पिछले वर्षों और सेमेस्टर में हमारे पाठ्यक्रम का 85% से ज्यादा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है, और हमने

पिछले सेमेस्टर के में इंटरनल/ सेशन / मिड - टर्म परीक्षाएँ दी हैं|

आईआईटी, एनएलयू, एनआईटी (सभी सेमेस्टर) और अन्य कॉलेजों / विश्वविद्यालयों के लिए इंटरमीडडएट

सेमेस्टर ने पिछले वर्षों पर नंबर देकर छात्रों को प्रमोट कर दिया है

सरकार उपरोक्त बिंदुओं के आधार पर मूलयाकंन करने पर विचार करें छात्रों को जल्द से जल्द डिग्री प्रदान

करें ताकि हम जल्दी से जल्दी अपनी आगे की पढ़ाई और जॉब्स कर सकें

 

आपको धन्यवाद, सादर

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